आजादी

सुबह चारो ओर बहती हुई बयार में चिड़ियों की चहचाहट मन को प्रफुल्लित कर रहीं है। वैज्ञानिक आविष्कार ओर बेतार के तार से कम होती संख्या ने यदपि यह आवाजें कम कर दी है। पर जब भी सुबह यह चहचाहट सुनायी देती हैं सुबह की शुरुआत सुहानी हो जाती हैं। आज तो यह ऐसा लग रहा था कि यह चहचहाते पक्षी अपनी आजादी की कहानी बयां कर रहे हैं। मन से तो घर के बंद दरवाजे भी अच्छे लगते है पर आज से 21 दिन घर मे ही रहना है ओर दिल की नहीं दिमाग की सुनना है यह बात मोहन को समझ मे आ रही है।इसलिए वह सोच रहा है चिडियाँ यह पंछी कितने स्वच्छंदता से उड रहे है, यह कितने आजादी से जहाँ मन चाह रहा है उड रहे है,पेड़ की डाल पर बैठ रहे है। मोहन सोचने लगा आजादी भी क्या है? आजादी के बिना घर मे रहना भी असंभव है। तभी उसका पालतू कुत्ता टाॅमीबैल्ट खींच कर बार बार बाहर घुमाने की जिद कर रहा था। वो समझ नहीं पा रहा था आजकल उसका मालिक बाहर क्यों नहीं जा रहाहै। टाॅमी का बार-बार के प्रयास से मोहन ने झल्लाकर कहा तू नही समझेगा मै कही।बाहर नहीं जा सकता। पर तुझे कोई बंदिश नहीं है,आज से तूआजाद जा जहाँ जाना है। मोहन नेटाॅमी को घर से बाहर घूमने के लिए छोड़ दिया। तभी पिंजरे से तोता की आवाज़ आयी।मोहन को लगा आज इसे भी आजाद करता हूॅ। पिंजरे के खुलते ही तोता नीचे आकर बैठ गया।मोहन भूल गया तोते के पर उस दिन कट गये थे जिस दिन यह पिंजरे में बंद किया गया था। वो क्या जाने स्वच्छंद आकाश की उडान।पर तभी स्वच्छंद बिल्ली जो कई दिनों से इस इंतजार मे थी झपट्टा कर ले गयी। मोहन आॅखों मे आंसू लेकर बैठा था।टॉमी बदहवास सा अंदर आया,उसकी छटपटाहट बता रही थी आज उसकी गैरहाजिर मे मित्र कहाॅ चला गया।मालिक की ओर देख वो वहीँ बैठ गया।उसे भीआजादी के मायने नहीं पता।वो तो सिर्फ वफादार है । डाॅ सुचिता श्रीवास्तव

लाॅकडाउन

चारो तरफ सन्नाटा है । रचना सोच रही थी वोहमेशा कहती थी दिनभर गाडियो के शोर उडती धूल से कब छुटकारा मिलेगा।नोकरीओर घर की व्यस्तता से कभी-कभी ऊब सी होती थी ।सोचती थी कुछ दिनोका आराम ले लिया जाए पर हो नहीं पा रहा था।पति देव से एक-दो दिन का देश व्यापक हड़ताल का जिक्र किया तो उन्होंने झल्लाकर कहा देश से बडा कोई भी नहीं है।उसका यह मजाक भरी सोच इतनी बडी होगी सोचा भी नहीं था। बंद दरवाजे, से आज उसे ऊबने सी लग रही थी।चाय पीते हुए उसने दरवाजे से झाँका तभी बेटा चिल्लाने लगा माँ 60की हो आप अंदर रहो । माँ झल्लाकर बोलीदिन भर का काम तो बढ गया है मेरा, तू तो कम्प्यूटर पर ही बैठा रहता है।फिर इतना तनाव किस चीज मे वाइरस आजाये कभी सब्जी दो बार धोती हू ,कभी- हाथ कभी हैंगर धोती हूँ ,कितनाभयावह समय है ।सुबह टीवी इस आशय से खोलती हू कोई खबर लाकडाउन खत्म की आ जाये थकान,अनिद्रा, एक अजीब सी अकुलाहटहै।स्कूल के बच्चो की मुस्कान याद आती हैं क्या करूँ। बेटा बोला माँ यह युद्ध है सभी को मिलकर लडना है। क्या करू माँ लाकडाउन के कारण मेरा काम ज्यादा हो गया है कंपनी को काम करकर देना पडता है।टाईम का बंधन भी नहीं रहा माँ। अब तेरे काम भी करवा दूँगा ऐसा करो माँ वो करो जो आपने कई वषो से पीछे छोड दिया है ।रचना ने कलम निकाली ओर कागज पर अपनी दिनचर्या मे कुछ घंटे अपने लिए लिख कर चिपका दिए ।पति पूछ बैठें यह क्या है?मेरा अपना समय ।आज उसे न थकान थी न भय आज उसकी कलम कहानी लिख रही थी। वर्षो से बंद पडी कला आज फिर जाग्रत हो गई ।

डा सुचिता श्रीवास्तव

आज की कहानी

आज चारो तरफ सन्नाटा पसरा है।यह बात जंगल में तेजी से फैल रही थी। सोनूहिरण ने यह बात अपनी बेटी रानी से कही । क्यो मा तुमने कभी शहर देखा है?रानीने पूछा।माँ बोली पहले अपना घर था वहां पर। रानी ने उत्साह से पूछा सच माँअब कैसा है वहां पर।?सिवाय शोर चे- पे ,चे -पे आवाज ,दोडती हुई गाडियाँ, धूल, धुआं, कीचड़, कचरा,पन्नियोका ढेर, लडाई-झगडे

आदमियों की अफरा तफरी,बडी बडी बिल्डिंग उसमें कैद बच्चे। एक बार गयी तो बीमार पड गयी । जंगल की हरियाली, हवा, भोजन,आपसी सौहार्द वहां नहीं। अब कभी नहीं जाऊँगी शहर।तब रानी ने कहा माँ मुझे देखना है शहर और अपना पुराना घर भी । यह कहकर रानी खेलने चली गई। रानी ने दोस्तों से कहा मुझे शहर देखना है । वहां बैठी लोमड़ी मोसी बोली चली जा आजकल वहां बडी शांति है ।नीलगाय ताई को भी ले जाना।रानी ने माँ से जिद की। साथ मे लोमड़ी मोसी , नन्हे हिरण, ताई नील गाय शहर घूमने निकल पडे। सारी सडके सूनी ,कर्फ्यू सा आलम ,शांति शांति। अरे यहाँ का माहौल तो तो माँ के बताये से बिलकुल अलग है ऐसा क्यों? आदमी कहॉहै ।तभी एक व्यक्तिदिखा,अरे इसने मुँह पर क्या लगा रखा है जंगलमे ऐसा कभी नही देखा । बार बार हाथ मे क्या लगा रहाहै।रानी ने माँ से पूछा? अरे बेटा ये बीमारी से बचने के लिए कर रहा है। तभी एक नन्हा हिरण नेपूछा मोसी हमको तो कुछ नहीं होगा ? लोमड़ी मोसी ने कहा नहीं यह बीमारी हमे नहीं होगी,हम तो जानवर है, रे यह तो आदमी की बनाईं बीमारी है।आदमी आदमी से मिलता-जुलता है तो बीमार हो जायेगा।पर मा तू तो कह रही थी आदमी आदमी की तरफ देखताभी नहीं। अरे बेटा सब अपने-अपने मतलब से मिलते-जुलते है ।एक बिल्डिंग केपास सोनू हिरण रुक गई ऑखों मे आंसू आ गये ।रानी समझ गई यह ही हमारा पुराना घर है। तभी एक बिल्डिंग की खिड़की से बच्चे चिल्लाने लगे काऊ के छोटे-छोटे बच्चे साथ मे बफेलो भी है ।यह सुन सभी नन्हे हिरण, नीलगाय, लोमड़ी हंस पडी। तभी किसी ने कहा डियर डियर। मा यह डियर क्यों कह रहें है? अरे अगेरजी की किताब मे देखा है यह नाम।माँ सबबबच्चे कैद है कितना गलतहैं ?लोमड़ी मोसी बोली रे अभी तो बीमारी के कारण नही खेल पा रहे वैसे भी इन्हें खेलने जगह नही है सो यह बस मशीनों के खेल बैठे बैठे खेलतेहैं ।रानी सोच रही थी हम तो आज भी आजाद है खेल सकतेहै आदमियों ने हमारी जगह छिनी, भोजन छिना,हमे मारकर खा भी लिया ,हमे हमेशा नीचा समझा ।शायद यही सजा है इनकी यह तो होना ही था पर बच्चे उनका तोकोई कसूर नही पर सजा तो वो भीकाट रहे हैं यह सोचकर उसका मन भर आया।फिर वो सोचकर बोली माँ अब घर चल कही हमारा नया घर भी न छिन जाये मै कैद नही होना चाहती। सभी दोडते हुए जंगल की तरफनिकल पडे।

-डा सुचिता श्रीवास्तव